रखे वो मुझे अपनी पलकों पे बिठाके, सहे मेरी सारी
नादानियां ।
जो सपने पूरा करने में दे मेरा साथ, जिसके साथ मिलके
लिखूँ मैं सफलता की कहानियां।।
हो जो हर परिस्थिति में साथ खड़ा मेरे, जीवन के हर
अंधेरे में बस हाथ थामा रह ले।।
हो साथ जिसके सुहानी जीवन की डगर, वो डगर काँटो
को भी फूल समझ के साथ मेरे सह ले।।
वो जिसे पता हो हर बात पे रोने वाली लड़की, खुद चुप
भी हो जाती है।
कमजोर नहीं, हर बार मुझसे नहीं होगा बोलके करके
दिखलाती है।।
जो समझे मैने उसके लिए घर है छोड़ा, पर माता पिता
का साथ नहीं।
मेरे बाबुल का आंगन और गांव की गलियों सा,
दूजा उसका कोई महल भी नहीं ।।