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जब भी बुलावा आएगा,अजय पोद्दार 'अनमोल'

अजय पोद्दार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब भी बुलाया जाएगा,
        
                                                    
                            
जब भी दरबार सजाया जाएगा,
समय की सीमा लांघी जाएगी,
कितनी भी आंधी आएगी,
मां के गोद में माथा रखकर,
अबोध सा बालक बनकर,
अच्छा लगता है सदा यूं रहकर,
मन के सारे भाव समर्पित,
जीवन का आधार समर्पित,
सारी अभिलाषा का सार समर्पित,
कर्मों का व्यवहार समर्पित,
मौन साधना मां ही जाने,
मां की ममतामयी आंखों से,
जब भी मां ने देखा मुझको,
एक शीतल छाव ने ढक लिया,
जब भी मां की ओर बढ़ाकर जोड़ हाथ रख दिया,
मां की करुणा मां ही जाने,
मेरा सब कुछ मां के चरणों पर,
रखकर मन पावन हो जाता है,
मां की दिव्यमयी छाया में,
आलोक शिखा का ज्योत जले,
जग की पालक है मां मेरी,
दुःख निवारक है उद्धारक है मां मेरी,
जपराग से जपराग तक,
एक घंटा पहले
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