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तू यूँ न ख़ामोश रहा कर

अजय कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तू यूँ न ख़ामोश रहा कर,
        
                                                    
                            
तेरी ख़ामोशी ही तेरे मन के
सबसे गहरे राज़ कह जाती है।
जो शब्द कभी होंठों तक नहीं आते,
वे आँखों की नमी बनकर
सब कुछ बता जाते हैं।

दर्द-ए-दिल की फ़रियाद
कभी किसी अपने से कर लिया कर।
हर पीड़ा को भीतर दबाकर
यूँ अकेले मत सहा कर।
मन भी एक नदी है,
बहता रहे तो निर्मल रहता है,
रुक जाए तो गहराई में
असंख्य तूफ़ान पलने लगते हैं।

पर हर किसी को अपना समझकर
अपने दुख और अपनी खुशियाँ
यूँ मत बाँटा कर।
दुनिया में चेहरे बहुत हैं,
मगर हर चेहरा सच्चा नहीं होता।
हर मुस्कान में अपनापन नहीं,
हर मीठी बात में विश्वास नहीं होता।

"हम तुम्हारे अपने हैं" —
यह कहने वाले
हज़ारों, लाखों मिल जाएँगे।
तेरे साथ चलने का वादा करेंगे,
तेरे आँसुओं को अपना बताएँगे।
लेकिन समय की आँधी आते ही
अक्सर वही लोग
सबसे पहले किनारा कर जाएँगे।

हर किसी को
अपने दिल का वैद्य मत समझा कर।
हर व्यक्ति मरहम लगाना नहीं जानता,
कुछ लोग तो घावों को
और गहरा कर जाते हैं।
तेरे विश्वास की मिट्टी से ही
अपने स्वार्थ का महल बना जाते हैं।

यह संसार बड़ा विचित्र है,
यहाँ छल भी मुस्कुराकर मिलता है,
धोखा भी अपनापन ओढ़कर आता है।
कुछ लोग हाथ थामने का अभिनय करते हैं,
पर अवसर मिलते ही
पीठ में खंजर उतार जाते हैं।

और सबसे बड़ा दुःख तो तब होता है,
जब वार किसी अजनबी का नहीं,
अपने कहलाने वालों का होता है।
वे मुस्कुराते हुए ज़ख्म देते हैं,
और हँसते-हँसते
दिल से विश्वास निकाल ले जाते हैं।

इसलिए ऐ मेरे मन,
पहचानना सीख लोगों की नीयत,
सिर्फ़ उनकी बातें नहीं।
जो हर सुख में साथ हों,
वे अपने हो भी सकते हैं,
पर जो हर दुःख में भी
तेरा हाथ न छोड़ें,
वही सच्चे अपने होते हैं।

अपनी ख़ामोशी को कमजोरी मत बना,
उसे अपनी शक्ति बना।
हर दर्द को दुनिया के सामने
बिखेरना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ आँसू प्रार्थना बनकर
ईश्वर तक पहुँच जाते हैं,
और वही सबसे सच्चा सहारा बनते हैं।

याद रख,
जीवन की राह में
धोखे भी मिलेंगे, विश्वास भी मिलेगा।
पर अपने मन की पवित्रता को
कभी मत खोना।
सच्चाई की लौ भले धीमी जले,
पर एक दिन वही
अँधेरों को मिटा देती है।

तू यूँ न ख़ामोश रहा कर,
पर हर किसी से भी मत कहा कर।
अपने दर्द को वहाँ व्यक्त करना
जहाँ प्रेम हो, विश्वास हो, अपनापन हो।
क्योंकि दिल अनमोल होता है,
इसे हर किसी के हाथों में
सौंप देना समझदारी नहीं।

और यदि कभी दुनिया से थक जाए,
तो अपने भीतर झाँक लेना।
वहाँ एक आवाज़ मिलेगी,
जो कभी धोखा नहीं देती।
वही तेरी सच्ची साथी है,
वही तेरी सबसे बड़ी ताक़त है।
5 घंटे पहले
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