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नज़रअंदाज़ ना कर मुझे

अजय कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्यार कर या कर नफ़रत, सब मंज़ूर है मुझे,
        
                                                    
                            
बस तू कभी नज़रअंदाज़ न करना मुझे।

तेरी ख़ामोशी भी सह लूँगा, तेरी नाराज़गी भी सह लूँगा,
बस अपने दिल से कभी दूर न करना मुझे।

तेरी हर बात में अपना नाम ढूँढ़ता हूँ,
तेरी हर ख़ामोशी में कोई पैग़ाम ढूँढ़ता हूँ।

तू पास रहे या मुझसे दूर रहे,
मैं हर हाल में तेरा साथ ढूँढ़ता हूँ।

तू चाहे तो मेरी मोहब्बत ठुकरा देना,
चाहे तो मेरी यादों को भी भुला देना।

मेरी चाहत तुझे बोझ लगे अगर कभी,
तो हँसकर मेरे हिस्से का दर्द मुझे लौटा देना।

पर यूँ बेख़बर होकर मुझसे गुज़र मत जाना,
मेरी आँखों में देखकर भी अनजान मत बन जाना।

मैंने तुझे दिल से चाहा है, कोई खेल नहीं,
मेरी मोहब्बत को यूँ ही बेकार मत समझ जाना।

तेरी एक मुस्कान मेरी दुनिया बदल देती है,
तेरी एक बात दिल में उम्मीद जगा देती है।

तू एक बार अपना कह दे तो जी उठता हूँ,
तेरी बेरुख़ी मेरी साँसों तक को रोक देती है।

मुझे तेरी मोहब्बत मिले, यह ज़रूरी नहीं,
मेरे हिस्से में तेरा होना भी ज़रूरी नहीं।

बस इतना कर देना कि जब कभी याद आऊँ,
तो मुझे भुला देने की कोशिश करना ज़रूरी नहीं।

तू चाहे तो मुझे अपना कह या पराया कर दे,
मेरी कहानी को अधूरा रख या पूरा कर दे।

मैं तेरे हर फैसले को सिर झुकाकर मान लूँगा,
बस मेरी मोहब्बत को कभी शर्मिंदा न कर दे।

मैं आज भी तेरी राह में खड़ा हूँ चुपचाप,
दिल में लिए वही पुरानी-सी एक आस।

तू लौट आए तो फिर से सब सँवर जाएगा,
वरना तेरी यादों के सहारे भी कट जाएगा हर दिन और हर रात।

प्यार कर या कर नफ़रत, सब मंज़ूर है मुझे,
तेरी हर खुशी भी दिल से मंज़ूर है मुझे।

बस एक बात मेरी हमेशा याद रखना,
नज़रअंदाज़ करना तेरा सबसे ज़्यादा नागवार है मुझे।
2 महीने पहले
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