तू ही मेरी शांति है,
तू ही मेरी अंतिम कामना।
जल्द मिलूँगा उसी मोड़ पर,
जहाँ अधूरी रह गई थी अपनी कहानी पुरानी।
एक दिन अवश्य लौटूँगा,
तेरे द्वार मुस्कान लिए।
हर अधूरा सपना पूरा होगा,
तेरा हाथ अपने हाथ लिए।
बस इतना याद रखना—
प्रेम कभी समय से हारता नहीं,
सच्चा इंतज़ार कभी व्यर्थ जाता नहीं।
जिस दिन फिर मिलेंगे हम,
उस दिन विरह की हर रात समाप्त होगी।
दो धड़कनें फिर एक हो जाएँगी,
और अधूरी प्रेमकथा
सदैव के लिए पूर्ण हो जाएगी।
मैं लौटूँगा...
यह केवल मेरा वादा नहीं,
मेरे जीवन का अंतिम प्रण है। :::