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चलो दशहरा घूम आएंँ

Ajay Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलो दशहरा घूम आएं
        
                                                    
                            
रावण कुंँभकर्ण और मेघनाथ
के जलते पुतलों को देख आएंँ
नवरात्रि का पंडाल सजा मनमोहक चलो मांँ के दर्शन कर आएंँ।

छन -छन तैरती तेलों में देखो
कैसे रस से भरी जलेबी
देखो कैसे छन रहें
रसगुल्ले और गरम समोसे
राजू राधा मुनिया
चलो खाएं गुड़-चीनी के मीठे गट्टे
और बेसन की बुनिया।

खाकर पानी और बताशे
चलो देखने चलें सरकस के
भिन्न -भिन्न तमाशे।

रंग -बिरंगे झूलों पर बैठें हम
साथ -साथ
और देखें कठपुतली का नाच।

राजू -राधा, मुनिया चलो हम भी
कर लें संग ताता -थयिया
फिर खाएंँ गरम पापड़ी
बुढ़िया के बाल
मटर के छोले और
संग में टिकिया -चाट।

देखो मिल रहें रंग -बिरंगे गुब्बारे
ढपली और गिटार
छोटे -बड़े बैट
और ढेर सारे बाल।
राजू बोला पहले मैं ले लूंँ
मम्मी को चूड़ी और
गुड़िया को एक छोटी सी कार।

सब संग में मेला घूमें
मिलकर खाएंँ आइस्क्रीम और कुल्फी
राबड़ी और गरम मूंगफली।

कुछ खाते, कुछ बचाकर घर भी लाते
गरम समोसे, जलेबी और बुनिया
शोर मचाते, भोंपू की आवाज लगाते
और झूमते, हंँसते - गाते
शाम को वह घर पर आते
बच्चों की यह निराली दुनिया।।
एक वर्ष पहले
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