आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चलो दशहरा घूम आएंँ

                
                                                         
                            चलो दशहरा घूम आएं
                                                                 
                            
रावण कुंँभकर्ण और मेघनाथ
के जलते पुतलों को देख आएंँ
नवरात्रि का पंडाल सजा मनमोहक चलो मांँ के दर्शन कर आएंँ।

छन -छन तैरती तेलों में देखो
कैसे रस से भरी जलेबी
देखो कैसे छन रहें
रसगुल्ले और गरम समोसे
राजू राधा मुनिया
चलो खाएं गुड़-चीनी के मीठे गट्टे
और बेसन की बुनिया।

खाकर पानी और बताशे
चलो देखने चलें सरकस के
भिन्न -भिन्न तमाशे।

रंग -बिरंगे झूलों पर बैठें हम
साथ -साथ
और देखें कठपुतली का नाच।

राजू -राधा, मुनिया चलो हम भी
कर लें संग ताता -थयिया
फिर खाएंँ गरम पापड़ी
बुढ़िया के बाल
मटर के छोले और
संग में टिकिया -चाट।

देखो मिल रहें रंग -बिरंगे गुब्बारे
ढपली और गिटार
छोटे -बड़े बैट
और ढेर सारे बाल।
राजू बोला पहले मैं ले लूंँ
मम्मी को चूड़ी और
गुड़िया को एक छोटी सी कार।

सब संग में मेला घूमें
मिलकर खाएंँ आइस्क्रीम और कुल्फी
राबड़ी और गरम मूंगफली।

कुछ खाते, कुछ बचाकर घर भी लाते
गरम समोसे, जलेबी और बुनिया
शोर मचाते, भोंपू की आवाज लगाते
और झूमते, हंँसते - गाते
शाम को वह घर पर आते
बच्चों की यह निराली दुनिया।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर