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मनुष्य अविश्वसनीय

Ajay Shobhane

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक चिड़िया को मैंने पाला ,
        
                                                    
                            
उसे चुगने को दाना डाला !
टुकुर-टुकुर वह देख रही थी ,
बेबस सी मुझे घूर रही थी !
मैंने पूछा क्यों रूठी हो चिड़िया रानी ?
क्यों तज ती हो दाना पानी ?
वो बोली–तुम ठहरे हो ठगी प्राणी ,
तुम्हारी विस्मय भरी सुनी कहानी !
दाना देकर हमें ललचाते ,
प्यारी बातें कर हमें लुभाते ,
न जाने किस फंदे में हमें फंसाते ?
अवसर पाकर , हमें चट कर जाते !
– अजय शोभने.
2 सप्ताह पहले
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