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होली एवम धूलिवंदन

Ajay Nayak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खेल रहे हैं दादा संग पोता
        
                                                    
                            
खेल रही है दादी संग पोती
कुछ ऐसा चढ़ा है फागुन का खुमार
खेल रहे हैं नाना नानी संग नातिन नाती

खेल रहे हैं राजा संग रंक
खेल रहे हैं साधु संग फकीर
कुछ ऐसा चढ़ा है फागुन का खुमार
खेल रहे हैं रामलला संग अयोध्यावासी

खेल रहे हैं भौजी संग भइया
खेल रहे हैं देवर संग भौजी
कुछ ऐसा चढ़ा है फागुन का खुमार
खेल रहे हैं हमारे लालू संग राबड़ी

खेल रहे हैं प्रकृति संग हम
खेल रहे हैं आग संग हम
कुछ ऐसा चढ़ा है फागुन का खुमार
खेल रहा है प्रकृति हम सब के संग

खेल खेल में रंग गए सबके गाल
पता नहीं चल रहा कौन किसका बाल
कुछ ऐसा चढ़ा है फागुन का खुमार
काले पीले नीले सबकी हो गई एक जात

कहीं घिसी जा रही है भंगिया
कहीं बनाया जा रहा है पकौड़ा
कुछ ऐसा चढ़ा है फागुन का खुमार
सब मिलकर पी रहें हैं गुजिया संग ठंडाईया

ये एक ऐसा है त्योहार
सारे रंग एक ही बाल्टी में जाते हैं घुल
भर फागुन चढ़ता है ऐसा खुमार
चैता के लिए भरता है हुंकार
 
एक वर्ष पहले
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