प्रेम की बात होनी चाहिए
बचपन से सुनते आए हैं
हमारे तुम्हारे कान
मनुष्य की मुख्य जरूरतें हैं
रोटी, कपड़ा और मकान
किंतु यह तो एक बात को
कहने का फिल्मी तौर है
किसी ने एक संवाद लिखा
जो कुछ लोगों को भा गया
औरों की स्मृति में छा गया
लेकिन इनके अलावा
जीवन की बड़ी जरूरत
एक दो और है
उनकी बात नहीं की जाती
यह वैसे ही नाइंसाफी है
गन्ने के रस की बात करना
जैसे गन्ने की बात के बिना
प्रत्येक जीवित मनुष्य जानता है
मकान से पहले या उसके साथ
रोटी और कपड़े के तुरंत बाद
उन सबको अर्थपूर्ण बनाने के लिए
उसे प्रेम करने की जरूरत है
और कभी-कभी तो जरूरी है
रोटी और कपड़े से पहले
प्रेम की बात होनी चाहिए
इसे अपराध घोषित नहीं किया है
अभी तक किसी सरकारी व्यवस्था ने
प्रेम की बात होनी चाहिए
रोटी में कोई स्वाद नहीं आता
स्वयं में से प्रेम निकाले व्यक्ति को
कई गुना बढ़ जाता है उसी रोटी का स्वाद
प्रेम के अदृश्य घी से चुपड़ने के बाद
खिल उठते हैं कपड़ों के रंग
चाहे जैसे भी हों उसके अंग
अरस्तू ने कहा था कि
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है
उन्होंने आगे यह भी कहा कि
मनुष्य राजनीति करेगा
धर्म की आड़ में
राजनीति के नाम पर
धर्म का नाम लेगा
धार्मिक कार्यों में कम रुचि लेगा
किंतु उसकी चर्चा नहीं करेगा
बिल्कुल नाम नहीं उचारेगा
जिसे सब दिन करना चाहता है
प्रेम, जिसके बगैर उसका
एक दिन भी नहीं कटता
जीवित होने का पता नहीं चलता
प्रेम की बात होनी चाहिए
प्रेम के बिना जीवन स्वादहीन
प्रेम के बिना रिश्ते प्रवाहविहीन
सुगम रिश्तों के बिना मकान अर्थहीन
समझने का सरल तरीका है
नमक के बिना भोजन स्वादहीन
प्रेम के बिना व्यवहार ऊर्जाहीन
कपड़ों की चमक-दमक बेमानी!
-अमर अद्वितीय 'बिसावर'