माँ तो माँ है,माँ होती है,
बच्चों के सुख-चैन की खातिर,
न जाने क्या-क्या खोती है।
माँ तो माँ है, माँ होती है...
नहीं चाहेगी दूर रखे माँ,
अपने जिगर के टुकड़े को,
बच्चों के कर्तव्य के आगे अक्सर,
माँ की ममता विवश होती है।
माँ तो माँ है,माँ होती है ...
बच्चों की खुशियों की खातिर,
होठों पर मुस्कान सजाकर,
माँ छुप-छुपकर रोती है।
माँ तो माँ है, माँ होती है…
— कुमार आदित्य यदुवंशी