छात्र-हित की मांगों को पाने के लिए ही खड़े हैं।
भूख से व्याकुल होकर वो जंतर-मंतर पे पड़े हैं।
सुन लो अब शासन, ज़रा इतना-सा अनुरोध मेरा,
सोनम वांगचुक को बचा लो, प्राण संकट में पड़े हैं।
- कुमार आदित्य यदुवंशी