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हक की आवाज़

Aditya devilalyadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            "जो चुप रहेगी जुबां-ए-खंजर, लहू पुकारेगा आस्तीन का,
        
                                                    
                            
तुम हक मांगने वाले युवाओं को मुजरिम कब तक बनाओगे?
सवालों को सलाखों के पीछे बंद करने वालो सुनो,
तुम उठती हुई हर एक बुलंद आवाज़ को कब तक दबाओगे?"
— आदित्य देवीलाल
4 घंटे पहले
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