मादकता कि अजब कहानी,
एक कि आग एक का पानी,
नयि नयि उठती मन उमंग,
चहुंओर फैलती मादक गंध।।
ऐसी फैली अल्हड़ता में,
यौवन कि चंचलता में।
प्रेमी को प्रियतम है दिखता,
प्रियतम को दिखती प्रेमिका।।
दोनों मे चलती मिलन लहर,
बरसाती रहती अजब कहर,
सारी सिमाए कूद फांद,
सारे नियम कानून लाघ ।
एक दूजे में खो जाते हैं,
एक दूजे के हो जाते हैं।
जब एक दूजे के हो ही गए,
एक दूजे में खो ही गए ।
फिर लाज कहा औ
रिवाज़ कहा,
सारे साज समाज कहा।
फिर दो दो नयना चार हुए,
एक गला एक हार हुए।
ज्यों राजा मिलता रानी से,
दूध मिले जा पानी से,
न पूछो प्रेम युद्ध कैसा,
कैसे हैं हथियार इसके,
नयनों से लड़ते नयन दिखे,
अधरों से लड़ते अधर दिखे ,
प्रेमी प्रेमिका को मधुर दिखे,
प्रेमिका प्रेमी को मधुर दिखे ।
यहां अंग अंग मिल जाते हैं,
सब रंग रंग मिल जाते हैं ।।
एक प्यासा एक प्याला है,
एक पीने एक पिलाने वाला है।
मत पूछो क्या क्या होता है,
जो हुआ नहीं वो होता है।।
-आदित्य दाहिया आदि