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“अपनी-अपनी दौड़”

Aditya Dahiya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनी अपनी मस्ती में सब मस्त है।
        
                                                    
                            
जीवन की भागदौड़ में व्यस्त हैं।।
आशाओं कि लगी लगामे राहें सपनों के।
हम सब घोड़े है,अपनी ही दौड़ो के।।
कोई अपने देश कमाएं, कोई गया विदेश।
समय ने सब के बदल दिए पहनावें परिवेश ।।
अलग-अलग हैं पथ सभी के और सभी विशेष।
सब की मंज़िल मिले सभी को कृपा करें महेश।।
-आदित्य दाहिया
4 घंटे पहले
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