आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

“अपनी-अपनी दौड़”

                
                                                         
                            अपनी अपनी मस्ती में सब मस्त है।
                                                                 
                            
जीवन की भागदौड़ में व्यस्त हैं।।
आशाओं कि लगी लगामे राहें सपनों के।
हम सब घोड़े है,अपनी ही दौड़ो के।।
कोई अपने देश कमाएं, कोई गया विदेश।
समय ने सब के बदल दिए पहनावें परिवेश ।।
अलग-अलग हैं पथ सभी के और सभी विशेष।
सब की मंज़िल मिले सभी को कृपा करें महेश।।
-आदित्य दाहिया
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर