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कभी मिलो अगर खुद से तुम

Aditi Bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी मिलो अगर खुद से तुम
        
                                                    
                            
क्या गम की चादर को उतार आना

ढलते सूरज की उस लाली के आंचल में छुप जाना
उन उड़ते हुए पंचियो की चहचहाहट में तुम गुनगुनाना

उन बरसाती बारिश की बूंदों का तुम सुकून सा बन जाना
और उस गीली मट्टी की भीनी भीनी खुशबू में महक जाना

किसी गहरी गुफा में उतरते हुए रास्ते से तुम खुद में उतर जाना
किसी या कि धड़कन को सुनने से पहले तुम अपने दिल से हाथ मिलाना

दूर उस कोने से आती ऊर्जा की तलाश में तुम खुद में कहीं अंदर तक चले जाना
कोई आकर जब तुम्हें तुम्हारी कमी बताए
तो सब सुनके ख़ुशी से तुम धन्यवाद अदा करो आना

निकले हो जुस्तजू के जो इस रास्ते पर
इसे मुकम्मल किये बिना तुम लौट के मत आना
आइए अगर मलाल दिल में किसी के लिए कोई
तन्हाई के आलम में उसे कही दफ़न कर आना
हमें मलाल पे डालना तुम खुद से प्रेम की मिट्टी कोई
और खुशियों के पैगाम से उसे सींच कर आना

कभी मिलो अगर खुद से तुम
तो आइने में खुदको देखके जरूर मुस्कुरा देना 
2 वर्ष पहले
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