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शीकवे गिले के बाद शिकायत पे आ गये

Abid Misbahi

Mere Alfaz
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सिकवे गिले के बाद शिकायत पे आ गये
दर्पण दिखा दिया तो अदावत पे आ गये

उस्ताद रह गये हैं निज़ामत के बास्ते
शागिर्द आज-कल के सदारत पे आ गये

धोखे मिले किसी को, किसी को दगा मिली
कुछ झूंठ बच रहे थे हुकूमत पे आ गये

बचपन में खेल और जबानी अयाल में
लाचार हो गये तो ज़ियारत पे आ गये

पेबन्द क्या लगा मेरे कुर्ते की जेब में
सारे अज़ीज़ खुलके बगावत पे आ गये

इस कशमकश में आज भी मुंसिफ़ फरार है
चूहे भी बिल्लियों बकालत पे आ गये

आबिद तमाम उम्र भटकते कहां- कहां
अच्छा हुआ जो राहे-मुहब्बत पे आ गये

इरफ़ान "आबिद" 

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