हमारी तरफ अदाएं न झुकाओ,
ये अदाएं तो जान ले लेती हैं,
झुकाओ न यूँ ही इन नज़रों को,
जो हर पल इम्तिहान लेती हैं।
अदाओं के दिए जो तुम झुकाओ,
ज़रा खुद को भी तो देख लो आईने में,
नहीं पता है तेरी इन आँखों का जादू,
जो उतर जाता है सीने में।
हमें न सताओ हम तो हैं अकेले,
यूँ चोरी-चोरी इन नज़रों से न वार करो,
ज़रा देर ही सही पर पहले चले जाओ,
या खुलकर हमसे प्यार करो।
अदा ये तेरी है कैसी बला,
जिसे देखकर भी मैं समझ न पाऊँ,
काले-काले बालों के पीछे छुपती है जो,
उस सादगी पर मैं मिट जाऊँ।
नशे की भांति तेरी ये मतवाली अदाएं,
दिल को घायल कर जाती हैं,
क्या जादू है तेरी इन आँखों में प्यारी,
जो चुपके से मन में बस जाती हैं।
ये जैसी चढ़ी है वैसे ही उतरती नहीं,
यह तो एक पावन नशा है,
हमारी तरफ अपनी अदाएं न झुकाओ,
इस दिल की बस यही दशा है।
उलझ कर रह गए हैं इन जुल्फों में,
जो कांधे पर आकर ढल रही हैं,
चढ़ जाए ये नशा तो क्या-क्या कर जाए,
धड़कनें अब बेकाबू चल रही हैं।
खुशबू है इन अदाओं में ऐसी,
जो मदहोश किए जाती है हर राह को,
झुकाओ न यूँ ही इन अदाओं के भाव को,
थाम लो इस टूटती हुई चाह को।
है तेरी इन काली जुल्फों की,
जो अम्बर पर छा जाती है,
झुकाओ न हमारी तरफ अदाएं ये अपनी,
जो हमें दीवाना बना जाती हैं।
हमारी तरफ अदाएं न झुकाओ,
ये अदाएं तो जान ले लेती हैं...