विज्ञापन

रूप का सांवलापन

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रोज़ रोज देखा मत कर,
        
                                                    
                            
रोज़ देखा मत करो आईना,
सरमा जाएगा।

ऐसे ही तैयार हो जाया करो,
लोगों का मक़बरा अख़बारों में आ जाएगा।

कल तक जो प्यारे ख़ूब थे,
उन्हें कैसे पहचानूं!
हल्के-फुल्के हवा में,
शायद हृदय का मन जागे।
9 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all