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अब खामोश हूँ

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उदासी नहीं, अब खामोश हूँ,
        
                                                    
                            
कहे दिल का मुसाफिर,
यही हूँ इधर!
ना जाने क्यूँ इतनी यादें रही,
मैं वक्त का आशिक तो नहीं,
अकेले लिखते रहे उदास था,
उसने पूछा था क्यूँ उदास था,
मैने कहा अकेली हर रात थी,
न तुमने देखा न कोई हद पार की,
वजह पूछती है दुनिया की क्या बात है,
वजह जानने में तुम्हारी ही बात है!
मैं न कहूँ न सब जान,
मै शांत हूँ।
2 महीने पहले
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