विज्ञापन

फिल्म जगत का दौर

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब हम संस्कृति को देखते हैं,
        
                                                    
                            
हम पुराने फिल्म जगत से भी दो कदम आगे की ऊँचाइयों तथा 'कल्पना' को आधार मानकर नए कदम बढ़ा रहे थे,
जो कि फिल्म को आनंददायक ,
शायद ही अब की फिल्मों में मिले,
क्योंकि पहले अच्छी 'विचार' को जोड़कर जो लिखते थे कहानियों को,
अपने समय के विषय को दिखाना।
अपने आस-पास पर आधार कहानियाँ बनाई जाती थीं,
सहयोगी रहते थे,
चाहे जो गंभीर में,
या फिल्मों का कोई एक किरदार निभाने वाले हों,
वो सभी अपने आप को पूर्ण रूप से आपस में सहयोग करते होंगे।
शायद आज भी ऐसा ही हो,
जो फिल्म को चलाने और विकास का ,
नया आधार होता है।
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile

Suresh Kumar

579 कविताएं

View Profile