न्यायालय में न्यायाधीश ने चश्मा उठाकर देखा,
वकील साहब खोए थे, बदल चुकी थी रेखा।
माहौल बड़ा अटपटा था, कोर्ट में सन्नाटा छाया था,
जैसे वकील साहब ने ज़हरीला लड्डू खाया था।
न्यायाधीश महोदय झल्लाए, बोले— "मियां, कुछ तो बोलो!मुकदमा आगे बढ़ाओ, अपनी फाइल तो खोलो!
"वकील साहब ठंडी आह भरके बोले— "हुज़ूर,
क्या खाक केस लड़ें,बाहर गलियारे में दो आशिक हैं खड़े।बिना बंदूक और गोली के ही, दोनों बेचारे मारे गए,
शादी का झांसा देकर, कोर्ट मैरिज की अर्जी दे गए।
अब फैसला आप ही करो माई-बाप, इन्हें जेल भेजें या ससुराल,
दोनों प्यार में शहीद हुए हैं, कोर्ट फीस का भी है बुरा हाल!"