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अहंकार की तोप

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तोप को ही बुलंद मानकर,
        
                                                    
                            
तुमने उसे यूँ ही चला दिया,
क्या दूसरों को थोड़ा कष्ट देकर,
तुमने माहौल को अपने अनुकूल बना लिया?

खुद पर तो तुम दर्द का एक प्रहार भी न सह सके,
पर दूसरों के हँसते-खेलते जीवन को नष्ट कर दिया।

दूसरों को तड़पाकर,
अपनों से अलग करके,
तुमने खुद को भी इंसानियत से कोसों दूर कर दिया।

अब तुम ही बताओ...क्या मैं उस पीड़ित के मन के भाव कहूँ?
या फिर तुम्हारी इस क्रूर इच्छा की बात कहूँ?
7 घंटे पहले
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