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मृगनयनी की चितवन में

ABHISHEK BHATT

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मृगनयनी की चितवन में, बंधी विरही की सांस!
        
                                                    
                            
समीप आ बैठिए, बुझे हृदय की प्यास!!
रूप सुधा रस पान हित, नयन रहे अकुलाय!
एक झलक के वास्ते, दिन भी बीता जाय!!
मान तजो सुकुमारि अब, हँस कर दो उपहार।
एक तुम्हारी हाँ बिना, सूना है संसार!!
एक घंटा पहले
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Shivam Awasthi

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