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भीड़ एक जनाजे की

Abhi Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी-१
        
                                                    
                            
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ
जब तलक प्राण थे वो बुरा ही रहा
मर गया आज तो सिर्फ़ गुणगान है
जिंदा रहते कभी हाल तक न लिया
कंधा देने को कितना परेशान हैं
उस जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ
आंख हैं सबकी नम देखकर अब उसे-२
घर के लोगों का रोकर बुरा हाल हैं।
जीते जी न खबर ली किसी ने कभी
मर गया आज तब गुदड़ी का लाल है।
उस जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ
उम्र कम थी मिले घाव गहरे बहुत-३
चोट ऐसी लगी जिसको सह न सका
सोंच कर मर गया होगा दिन रात ये
लाख कोशिश से भी अच्छा बन न सका
उस जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ
अब मिला साथ सबका तो मै चल दिया-4
तब मिला होता गर साथ जाता नहीं
अब चले जाओ सब लोग घर की तरफ
आपलोगों से अब कोई नाता नहीं
उस जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ
हो गई शाम सब घर को जाने लगे-5
काम किस दिन में है ये बताने लगे
न कोई बीबी बच्चों की परवाह थी
खाने में क्या रहेगा लिखाने लगे
उस जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ
चार दिन पहले जो रो रहे थे बहुत-6
आज घर में उसी खिलखिलाते मिले
जिसने बोला था मेरा दिया बुझ गया
आज वो भी वहां मुस्कुराते मिले
उस जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी-
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ
एक भोली सी सूरत छपी चित्र में-7
फूल उसपर सभी फिर चढ़ाने लगे
जीते जी जो बुरा था बुरा ही रहा
फिर से गुणगान ही उसका गाने लगे
उस जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी-
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ
पड़ गई मेज व लग गई कुर्सियाँ -8
चाव से फिर सभी खाना खाने लगे
कुछ ने खाया वही जो मिला थाल में
कुछ गरम पूड़ी दो हक जमाने लगे
उस जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी-
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ
जो है देखा सुना बस उसी को लिखा-9
तुमने दी होगी मिट्टी तुम्हे भी दिखा
हश्र तेरा भी होगा यही मरने पर
न भ्रम पालो की मै हूँ सब कुछ यहाँ
उस जनाजे में थी भीड़ कितनी बड़ी
देख कर मै उसे इतना हैरान हूँ ।
 
एक घंटा पहले
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