ख़तो-किताबत की बात ही कुछ और है
दिल की लगी का ख़याल भी कुछ और है
ख़त में उभरती तस्वीर का आलम ये है
कि उसके दीदार का मोल भी अनमोल है
-अभय ‘अवधी