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संगतराश

Abhay Gaur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़्वाबों की चाहत में मैं सोने लगा
        
                                                    
                            
संग न बन जाऊँ इसलिए हँसने लगा
वो जाते जाते एक कमाल कर गए
धीरे-धीरे मैं एक मुजस्समा बनने लगा
-अभय ‘अवधी ‘
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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