दीवानगी की जो अहमियत समझते हैं
वो ही इश्क़ का दर्जा समझते हैं
जो सफ़र में गर्दिश से गुज़र जाते हैं
वो ही ज़िंदगी का सफ़र तय करते हैं
जिन्हें साहिल की दरकार नहीं होती
वो ही मौजों के सहारे किनारे लगते है
जो ख्वाहिशों के ग़ुलाम होते है
वो इलाही से हमेशा दूर रहते है
वफात से जो मुँह छुपाते है
वो ही हयातों की सज़ा पाते है
-अभय ‘अवधी’