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हम मीना के सैलाब में मीलों बहते चले गए

Abhay Gaur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उनकी तवज्जो न मिली दिल को,
        
                                                    
                            
बस अफ़साने बनते गए
राहों में बिछाया दिल पर
सिर्फ बहाने मिलते गए
करम उनके हम सिर्फ
हिसाब में गिनते रहे
और ज़ुल्म हम उनके
मुसलसल दफ़्न करते गए
तहरीर हमारी गोया एक
दास्तानें इश्क़ बन गई
उनकी मोहब्बत में बस
हम खोए चले गए
वो अपने न बन सके
हमारा दिल भी हुआ गुम
और हम मीना के सैलाब
में मीलों बहते चले गए
-अभय ‘अवधी’
23 घंटे पहले
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