इक घड़ी भी न चैन की पाई
यार जब से बजी है शहनाई
आजकल के अजी सफीपुर में
एक बाक़ी रही न अमराई
चैन मिलता नहीं ज़रा सा भी
इश्क़ होता सदा ही दुखदाई
आँख को मूँद मत भरोसा कर
आज लीडर बड़ा है हरजाई
कामकोई किसी केआता कब
सब के सब मौन हैं तमाशाई
-हमीद कानपुरी