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चलें मां का भजन कीर्तन करें

आर्षमन उत्तरांचली

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलें मां का भजन कीर्तन,
        
                                                    
                            
करें आराधना मां की ।
सवारी शेर की करके,
चलेगी मां लिये झांकी ।
चलें मां का भजन कीर्तन.........

वहीं पूजा हवन होगा,
पड़े समिधा में आहुतियां ।
जलेगी धूप दीपक और महकेंगी अगरबत्तियां।
भगत भी सब विनत होंगे,
जो जयकारे लगाएंगे ।
निराशा से दुखी मन की विरत आशा जगाएंगे।
अनिश्वरवादियों की भी,
न हो कोई अरुचि आंकी ।
दरस साक्षात हों मां के,
कृपा सब पर रहे बांकी ।
चलें मां का भजन कीर्तन........

जलाकर दीप श्रद्धा का,
लिये विश्वास धात्री मां ।
करो मन कामना पूरी मेरी भी सिद्धिदात्री मां ।
नमो अम्बे जगत जननी,
भवानी मां नमन तुमको ।
कृपा करके, परे रखना, बुराई से सदा मुझको।
मनोरथ टूटता उसका,
कि जिसने धूल ही फांकी ।
शरण में हैं तुम्हारे मां,
कि खुशहाली हो अब बाकी ।
चलें मां का भजन कीर्तन........

विपन्नता दूर हो घर की,
कृपा कर मां उचित वर दो ।
तमस हो चूर अंतस का, क्षुधातुर वेदना हर दो।
रहे समृद्धि जीवनभर ,
कि नैया पार खेकर दो ।
हमें स्कंदमाता तुम अमिट वात्सल्य से भर दो।
निरीहों पर हो अनुकंपा,
सदा ही छाॅंह हो माॅं की ।
निरापद हों सुता अबला,
न निंदित नार हो याॅं की ।
चलें मां का भजन कीर्तन........

शिवांगी पार्वती अम्बे,
शुभंकर चंद्रघंटा मां ।
मिटा दो दुष्टता जड़ से, न हो दुष्टों का टंटा मां।
नरों में हैं छुपे दानव ,
अहम जिननें स्वीकारा था ।
दमन उनका करो जैसे महीषासुर को मारा था।
दशों हाथों में आयुध हों,
दिखे अति चारु छवि मां की ।
बनें फिर से महाचंडी,
हरो दुविधाऍं दुनियां की ।
चलें मां का भजन कीर्तन........
-पपेन्द्र सिंह धिरवाण 'आर्षमन
2 घंटे पहले
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