इस नीले आँचल में पता नहीं कितने तारे होंगे,
कुछ साथ-साथ ही चलते होंगे, कुछ बिल्कुल तन्हा प्यारे होंगे।
जब कोई तारा टूटता होगा, इस भीड़ से रुख़सत होता होगा,
क्या कोई थमी-सी आँख लिए
उसके लिए तन्हा रोता होगा?
क्या बाक़ी चमकते तारों को उसकी याद आती होगी,
या नए नूर की महफ़िल में गुम कोई फ़रियाद होगी?
क्या टूटते तारे के लिए भी कोई रोता होगा?
-आराध्या गर्ग