यूँ लहराती ज़ुल्फ़ों से हमारा दिल चुराया न करो,
महकती फ़िज़ाओं में इश्क़ का ज़हर मिलाया न करो।
तुम्हारी एक मुस्कान से साँसें भी बहक जाती हैं,
यूँ हर नज़र से हमें अपना बनाया न करो।
हम पहले ही क़ैद हैं तुम्हारी मोहब्बत की सलाख़ों में,
अब पलकों की कैद का नया फ़रमान सुनाया न करो।
अगर निभानी नहीं है उम्रभर की वफ़ा,
तो ख़्वाबों में आकर दिल यूँ बहलाया न करो।
हम संभल भी न पाएँगे तेरी बेरुख़ी के बाद,
यूँ मोहब्बत जगा कर फिर आज़माया न करो।
यूँ दिल को उम्मीदों की शमा दिखाया न करो,
अगर अपने नहीं हो, तो अपना बताया न करो।