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समर्पण कविता: गुरुदक्षिणा

आचार्य प्रवेश कुमार धानका

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भगवा ध्वज है गुरु हमारा,
        
                                                    
                            
यह है सब गुरुओं से न्यारा।
देश-प्रेम का ज्ञान दिया है,
नैतिकता का भान दिया है।
गुरुवर ने हमको नेक बनाया-
और परोपकार का मार्ग दिखाया।।
आज समय गुरुदक्षिणा का आया, आज समय गुरुदक्षिणा का आया।

जब भी आई भीषण आपदा,
संकट में था देश हमारा।
बाढ़, भूकंप या महामारी में,
स्वयंसेवक बन बना सहारा।
प्राण हथेली पर रख अपनी,
हर पीड़ित को गले लगाया।।
आज समय गुरुदक्षिणा का आया, आज समय गुरुदक्षिणा का आया।

विद्याभारती के आंगन से,
ज्ञान-संस्कार की अलख जगाई।
सेवा भारती का मंत्र देकर,
बस्तियों में खुशहाली लाई।
भेदभाव का भेद मिटाकर,
समरसता का भाव जगाया।।
आज समय गुरुदक्षिणा का आया, आज समय गुरुदक्षिणा का आया।

आरोग्य भारती की सेवा से,
स्वस्थ राष्ट्र का मार्ग दिखाया।
वनवासी कल्याण आश्रम,
वनपुत्रों को गले लगाया।
संस्कृति और अस्मिता की खातिर,
लड़ना और बढ़ना सिखाया।
आज समय गुरुदक्षिणा का आया, आज समय गुरुदक्षिणा का आया।

शास्त्र के साथ साथ-साथ,
शस्त्र का भी ज्ञान कराया।,
जब भी हुए कमजोर हम,
सम्बल देकर हमें उठाया।
स्वयंसेवक शब्द दिया -
और राष्ट्रधर्म का पाठ पढ़ाया।।
आज समय गुरुदक्षिणा का आया, आज समय गुरुदक्षिणा का आया।

इस पावन भगवा गुरुवर ने,
जीवन का हर ज्ञान सिखाया।
त्याग, समर्पण, राष्ट्र-प्रेम का,
मन में पावन भाव जगाया।
गुरुवर ने प्रेरित करके हमको,
कर्तव्य पथ पर चलना सिखाया।।
आज समय गुरुदक्षिणा का आया, आज समय गुरुदक्षिणा का आया।

कोटि-कोटि हाथों का बल लेकर,
नभ पर इसका मान बढ़ाया।
दुनिया पूजे इस पावन पट को,
ऐसा अनुपम कार्य कमाया।
विश्व पटल पर भारत चमके,
गौरव का वह पल है आया।।
आज समय गुरुदक्षिणा का आया, आज समय गुरुदक्षिणा का आया।

सब कुछ दिया गुरुवर ने हमको,
अब हम भी दें श्रद्धा से इनको।
मन समर्पण, तन समर्पण,
थोड़ा सा अब धन समर्पण।
जिस गुरु ने हमको राह दिखाई,
मिलकर उनका मान बढ़ाया।।
आज समय गुरुदक्षिणा का आया, आज समय गुरुदक्षिणा का आया।

गुरु दक्षिणा का प्रण था जो,
उसको मैंने आज निभाया।
नमस्ते सदा वत्सले,
मातृभूमि को शीश झुकाया।
सेवा और समर्पण का,
भाव प्रवेश के मन में आया।
आज समय गुरुदक्षिणा का आया, आज समय गुरुदक्षिणा का आया।
-आचार्य प्रवेश कुमार धानका
 
2 महीने पहले
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