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बारिश हो रही है आजकल

आशीष मोहन

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नहा लिया है पेड़ों ने
        
                                                    
                            
साफ-सुथरे से लग रहे है पत्ते।
छोटी-छोटी नावों के मालिक नावों संग उछल रहे हैं बच्चें।
उजड़े से चेहरे में आंसू कि लकीर लिए,
बैठे थे जो कल तक।
किसान देवता भी मुस्कुरा दिए हैं,
आज चेहरे में लिए संबल।
लगता है बारिश हो रही है आजकल।

गड्डे, गलिया, पोखर, कुएं
भर गए हैं तालाब।
पानी-पानी हर सू है
पानी का शबाब।
ऊंघते-अनमने थे जो
अब तो मुस्कुरा रहे हैं जंगल।
लगता है बारिश हो रही है आजकल।।

हरिया बांट रहा है गुड़ ।
चेहरे में लिए गाँव
मुस्कुरा रहा है मुड-मुड।
हो जायेगा नन्हीं का ब्याह
चुक जायेगा मेरा कर्ज,
बच गई है मेरी फसल।
लगता है बारिश हो रही है आजकल।।

आशीष मोहन
झिरी, छपारा
सिवनी (मध्य - प्रदेश)
४८०८८७
4 वर्ष पहले
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