विज्ञापन

मेरे दोस्त

A Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनी औकात पर उतर आए है
        
                                                    
                            
अब मेरे दोस्त भी मेरे सामने ही
मेरी जात पर उतर आए है

मैं उन्हें अपना ही मानता था फिर भी
वो अपनी बात उतर आएं है

मुझे दोस्ती के सिवा कोई रिश्ता नहीं आता
मैं उसको निभाता हूं मुझे दगा करना नहीं आता

फिर भी वो मेरे जज़्बात पर उतर आए है
सब मेरी जात पर उतर आये हैं।

दिया था वक्त जो उसको गवारा समझा
मेरे हर एक काम के साथ मुझे नक्कारा समझा

शायद उन्हें मुझसे ज्यादा गैरों की बातों पर भरोसा है
मेरी बातों को तराजू में तौलने का मिला मौका है

तौल डाला मेरा विश्वास और अपने वादों को
नहीं कर पाएं है अब भी गलत साबित मुझको

चलती है मेरी दोस्ती लंबे अरसे तक
मुझे मालूम है फ़िर से आयेंगे मेरे दोस्त मेरे घर तक

मेरी दोस्ती इतनी कमजोर नहीं होती
दूसरों की बातों के आगे ढेर नहीं होती

लगता है अब भ्रम से जाग कर आए है
अब मेरे दोस्त अपनी औकात पर उतर आए है
मेरे सामने ही मेरी जात पर उतर आए है ।।
-आकाश कुमार
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all