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विश्व नींद दिवस: पढ़िए चुनिंदा शेर....

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  इश्क़ में नींद नहीं आती, सपने आते हैं, पता नहीं चलता कि जागती आंखों में सपने कैसे आते हैं। शायरी में नींद आने और न आने को शायरों ने विभिन्न एहसासों में ढाला है। पेश है 'नींद' पर बेहतरीन शेर..

अब आओ मिल के सो रहें तकरार हो चुकी 
आँखों में नींद भी है बहुत रात कम भी है 
- निज़ाम रामपुरी

उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए 
कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए 
- इरफ़ान सिद्दीक़ी

बिन तुम्हारे कभी नहीं आई 
क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है 
- जौन एलिया
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इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई 
हम न सोए रात थक कर सो गई 
- राही मासूम रज़ा

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे 
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो 
- राहत इंदौरी

शाम से उन के तसव्वुर का नशा था इतना 
नींद आई है तो आँखों ने बुरा माना है 
- अज्ञात

आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा 
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई 
- इक़बाल अशहर

नींदों में फिर रहा हूँ उसे ढूँढता हुआ 
शामिल जो एक ख़्वाब मिरे रत-जगे में था 
- अहमद मुश्ताक़

भरी रहे अभी आँखों में उस के नाम की नींद 
वो ख़्वाब है तो यूँही देखने से गुज़रेगा 
- ज़फ़र इक़बाल

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है 
उन की आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं 
- ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

नींद को लोग मौत कहते हैं 
ख़्वाब का नाम ज़िंदगी भी है 
- अहसन यूसुफ़ ज़ई

कैसा जादू है समझ आता नहीं 
नींद मेरी ख़्वाब सारे आप के 
- इब्न-ए-मुफ़्ती

नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी 
सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में 
- आदिल मंसूरी

नींद आती है अगर जलती हुई आँखों में 
कोई दीवाने की ज़ंजीर हिला देता है 
- शहज़ाद अहमद
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