वैलेंटाइन डे प्रेम का उत्सव है। यह आदमी को ताजगी का एक नया एहसास देता है। परंपरावादी इसका विरोध भी करते हैं। वास्तव में वैलेंटाइन डे में सच्चे प्रेमी प्रेम की पुरानी परंपरा को और हसीन करते हैं। वहीं आधुनिक लोग इस उत्सव के जरिए ताजगी को महसूस करते हैं। वैलेंटाइन डे में आज किस डे है। चुंबन के इस दिन को हम इस हसीं गीत के साथ और खुशगवार बनाएंगे।
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1979 में रिलीज द ग्रेट गैंबलर में अमिताभ बच्च्न और जीनत अमान अभिनीत इस गीत में जोश और उत्साह को एक सुंदर से मतलब के साथ समझाया गया है। जोश और उत्साह को समझाया गया है। आनंद बक्षी के इस गीत को आशा भोसले, अमिताभ बच्चन और शरद कुमार ने आवाज दी है। राहुल देव बर्मन का जादुई संगीत गीत में चार चांद लगा रहा है।
गीत का पहला बोल ही बड़ा मधुर है। जिसमें साफ किया गया है कि जोश और उत्साह जिसे हम प्रेम और जवानी कुछ भी कह सकते हैं। सबका अपना आनंद है। दो लफ्जों से दिल की कहानी के तार बुने जाते हैं। पहला शब्द है मोहब्बत और दूसरा शब्द जवानी है। जोश और उत्साह इन्हीं दोनों शब्दों के इर्द-गिर्द रहते हैं। कई सिर्फ मोहब्बत करते हैं तो कई सिर्फ जवानी की रेल में ही सवार रहते हैं। कुछ ऐसे भी है जो अपनी मोहब्बत को ही जवानी से मिला लेते हैं। लिहाजा मोहब्बत के दिनों में यह गीत को काफी प्रासंगिक है।
दो लफ़्ज़ों की है, दिल की कहानी
या है मोहब्बत, या है जवानी
गीत कह रहा है कि दिल की बातों का मतलब पूछिए मत बस हर हाल में दिल की हालत को शिद्दत से महसूस करिए।
दिल की बातों का मतलब न पूछो
कुछ और हमसे बस अब न पूछो
जिसके लिये है, दुनिया दीवानी
या है मोहब्बत, या है है जवानी
जिंदगी गम और खुशी के बीच की एक हसीं कड़ी है। इस जिंदगी को हमेशा गले से लगाए रखिए। हमेशा उत्साह के साथ जिंदगी के दिन काटिए।
इस ज़िंदगी के, दिन कितने कम है
कितने है ख़ुशियाँ, और कितने ग़म हैं
लग जा गले से, रुत है सुहानी
या है मोहब्बत, या है जवानी
प्रेम में डूबा व्यक्ति अपने आप ही गुनगुनाता है। इस गीत में यहीं बताया गया है। जब कोई किसी को याद करता है तो वह प्रेम गीत गाता है।
ये कश्ती वाला, क्या गा रहा है
कोई इसे भी, याद आ रहा है
जिसके लिये है, दुनिया दीवानी
या है मोहब्बत, या है जवानी
दो लफ़्ज़ों की है, दिल की कहानी
या है मोहब्बत, या है जवानी