किस डे में हिंदी फिल्मों के कुछ गीत आपके लिए यादगार हो सकते हैं। वैलेंटाइन डे के अवसर पर काव्य चर्चा सेक्शन में हम आपके समक्ष होंठ और किस का जिक्र करने वाले गीतों का उल्लेख करेंगे। आप भी इस गीत को यहां सुनिए और किस डे के मजे को दुगुना कीजिए...
छू लेने दो नाज़ुक होठों को...
1965 में रिलीज फिल्म काजल के इस गीत को साहिर लुधियानवी ने लिखा है। संगीतकार रवि हैं। मोहम्मद रफी की रुहानी आवाज ने गीत में चार चांद लगा दिए हैं। राजकुमार और मीना कुमारी पर इसे फिल्माया गया है।
छू लेने दो नाज़ुक होठों को
कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हमको बख़्शा है
वो सबसे हंसीं ईनाम हैं ये
शरमा के न यूँ ही खो देना
रंगीन जवानी की घड़ियाँ
बेताब धड़कते सीनों का
अरमान भरा पैगाम है ये, छू ...
अच्छों को बुरा साबित करना
दुनिया की पुरानी आदत है
इस मै को मुबारक चीज़ समझ
माना की बहुत बदनाम है ये, छू ...
होंठो से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो...
1981 में रिलीज फिल्म प्रेम गीत का यह गीत काफी मधुर है। जगजीत सिंह ने इसमें आवाज दी है। जगजीत सिंह ने ही इस गीत को संगीत से सजाया है। गीत के बोल काफी मार्मिक हैं। इंदीवर के लिखे गीतों में यह तरन्नुम काफी प्रसिद्ध है।
होंठों से छू लो तुम
मेरा गीत अमर कर दो
बन जाओ मीत मेरे
मेरी प्रीत अमर कर दो
न उमर की सीमा हो
न जनम का हो बंधन
जब प्यार करे कोई
तो देखे केवल मन
नई रीत चलाकर तुम
ये रीत अमर कर दो
होंठों से छूलो तुम ...
जग ने छीना मुझसे
मुझे जो भी लगा प्यारा
सब जीता किये मुझसे
मैं हर दम ही हारा
तुम हार के दिल अपना
मेरी जीत अमर कर दो
होंठों से छूलो तुम ...
आकाश का सूनापन
मेरे तनहा मन में
पायल छनकाती तुम
आजाओ जीवन में
साँसें देकर अपनी
संगीत अमर कर दो
होंठों से छूलो तुम ...
भीगे होठ तेरे प्यासा ये दिल मेरा...
साल 2004 में रिलीज फिल्म मर्डर का यह गीत भी किस और होंठ को लेकर काफी चर्चित है। अनु मलिक ने इसमें संगीत दिया है। सईद कादरी के इस गीत को कुनाल गांजावाला ने अपनी कर्णप्रिय आवाज दी है।
भीगे होंठ तेरे, प्यासा दिल मेरा
लगे अब्र सा, मुझे तन तेरा
जम के बरसा दे, मुझ पर घटायें
तू ही मेरी प्यास, तू ही मेरा जाम
कभी मेरे साथ, कोई रात गुज़ार
तुझे सुबह तक मैं करूँ प्यार
वो ओ ओहो...
साँसें आँच तेरी, तन आग तेरा
छीने नींद मेरी, लूटे चैन मेरा
काला जादू करे, लंबे बाल तेरे
आखें झील तेरी, डोरे लाल तेरे
कभी मेरे साथ...
आँखें कह रही, जो ना हम कहें
उसे सुन ले तू, जो ना लब कहें
तू ना सोए आज, मैं ना सोऊँ आज
तुझे देखूँ आज, तुझ में खोऊँ आज
कभी मेरे साथ...
रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना...
साल 1969 में रिलीज फिल्म आराधना के इस गीत पर संगीत सचिन देव बर्मन ने दिया है। आनंद बक्षी के इस गीत को किशोर कुमार ने अपने सुरों से सजाया है। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की दिलकश अदा ने इस गीत को और हसीन बना दिया है।
रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना
भूल कोई हमसे ना हो जाये
(रात नशीली मस्त समा है
आज नशे में सारा जहाँ हैं) - (२)
आये शराबी मौसम बहकाये - ए - ए - ए ...
रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना
भूल कोई हमसे ना हो जाये
(आँखों से आँखें मिलती हैं जैसे
बेचैन होके तूफ़ाँ में जैसे) - (२)
मौज कोई साहिल से टकराये - ए - ए - ए ...
रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना
भूल कोई हमसे ना हो जाये
(रोक रहा है हमको ज़माना
दूर ही रहना पास ना आना) - (२)
कैसे मगर कोई दिल को समझाये - ए - ए - ए ...
रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना
भूल कोई हमसे ना हो जाये
होंठों में ऐसी बात मैं दबाके चली आई...
साल 1967 में रिलीज फिल्म ज्वेल थीफ का यह गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा है। सचिन देव बर्मन ने इसमें संगीत दिया है। वैजयंती माला की दिलकश अदा और लता मंगेशकर की आवाज ने इस गीत को हमेशा के लिए यादगार बना दिया है।
होंठों में ऐसी बात मैं दबाके चली आई
खुल जाये वोही बात तो दुहाई है दुहाई
हाँ रे हाँ, बात जिसमें, प्यार तो है, ज़हर भी है, हाय
होंठों में...
हो शालू...
रात काली नागन सी हुई है जवां
हाय दय्या किसको डँसेगा ये समा
जो देखूँ पीछे मुड़के
तो पग में पायल तड़पे
आगे चलूँ तो धड़कती है सारी अंगनाई
होंठों में...
हो शालू...
ऐसे मेरा ज्वाला सा तन लहराये
लट कहीं जाए घूँघट कहीं जाये
अरे अब झुमका टूटे
के मेरी बिंदिया छूटे
अब तो बनके क़यामत लेती हूँ अंगड़ाई
होंठों में...
8 वर्ष पहले