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किस डे पर आपके लिए यह 10 बड़े शेर... 

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  वैलेंटाइन उत्सव में किस डे काफी रोचक होता है। इस दिन प्रेमी-प्रेमिकाओं के चेहरे के भाव लाजवाब होते हैं। ऐसे अवसर पर हम अपने पाठकों के लिए 10 बड़े शेर और कविताएं पेश कर रहे हैं। उम्मीद है यह किस डे पर आपको गुलजार करेंगे।     
                                                              
                  

                    
                                        
                         
                                                                                   
                            
                         
                                                            
                                
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पहला चुंबन...

एक जीवित पत्थर की दो पत्तियाँ
रक्ताभ, उत्सुक
काँपकर जुड़ गई
मैंने देखा :
मैं फूल खिला सकता हूँ।


-अशोक वाजपेयी 

मदिराधर चुंबन, प्रसन्न मन...

मदिराधर चुंबन, प्रसन्न मन,
मेरा यही भजन औ’ पूजन!
प्रकृति वधू से पूछा मैंने
प्रेयसि, तुझको दूँ क्या स्त्री-धन?
बोली, प्रिय, तेरा प्रसन्न मन
मेरा यौतुक, मेरा स्त्री धन!


-सुमित्रानंदन पंत 

बोसे ले लेते हैं हम दो-चार हँसते बोलते

दिल-लगी में हसरत-ए-दिल कुछ निकल जाती तो है
बोसे ले लेते हैं हम दो-चार हँसते बोलते

-अमीरुल्लाह तस्लीम

दी जान हम ने चश्मा-ए-आब-ए-हयात पर

बोसा लिया जो उस लब-ए-शीरीं का मर गए
दी जान हम ने चश्मा-ए-आब-ए-हयात पर

-अमीर मीनाई 
 

जो हरारत थी मिरी उस के बदन में आ गई

एक बोसा होंठ पर फैला तबस्सुम बन गया
जो हरारत थी मिरी उस के बदन में आ गई

-काविश बद्री
 

बस चुप रहो हमारे भी मुँह में ज़बान है

क्या ख़ूब तुम ने ग़ैर को बोसा नहीं दिया
बस चुप रहो हमारे भी मुँह में ज़बान है

-मिर्ज़ा ग़ालिब
 

चूम सरित की सलिल राशि खिल रहे कुमुद दल...

लहर रही शशिकिरण चूम निर्मल यमुनाजल,
चूम सरित की सलिल राशि खिल रहे कुमुद दल

कुमुदों के स्मिति-मन्द खुले वे अधर चूम कर,
बही वायु स्वछन्द, सकल पथ घूम घूम कर

है चूम रही इस रात को वही तुम्हारे मधु अधर
जिनमें हैं भाव भरे हु‌ए सकल-शोक-सन्तापहर!


-सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
8 वर्ष पहले
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