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'उड़ान' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

deepali agrawal

Kavya Charcha
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मिरी उड़ान अगर मुझ को नीचे आने दे
तो आसमान की गहराई में उतर जाऊँ
- वहीद अख़्तर


मैं पर-शिकस्ता न था बादलों के बीच मगर
मिरी उड़ान का ज़ंजीर से लिपट जाना
- सय्यद अमीन अशरफ़

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उसे गुमाँ है कि मेरी उड़ान कुछ कम है
मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है
- नफ़स अम्बालवी


ऊँची उड़ान के लिए पर तौलते थे हम
ऊँचाइयों पे साँस घुटेगी पता न था
- आशुफ़्ता चंगेज़ी

इक परिंदा अभी उड़ान में है
तीर हर शख़्स की कमान में है
- अमीर क़ज़लबाश


परिंदा शाख़ पे तन्हा उदास बैठा है
उड़ान भूल गया मुद्दतों की बंदिश में
- खलील तनवीर

उड़ना हम सिखला देंगे
आप ज़रा से पर खोलें
- अंजुम लुधियानवी


जितने ऊँचे ख़याल होते हैं
उतनी ऊँची उड़ान होती है
- हफ़ीज़ बनारसी

आसमां सोच कर उड़ान भरी
चार सम्तों से इक ख़ला उभरा
- फ़ारूक़ मुज़्तर


आसमाँ तक उड़ान है मेरी
मैं भला किस के हाथ आता हूँ
- फ़रहान हनीफ़ वारसी

6 वर्ष पहले
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