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शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी और ये 10 बड़े शेर...

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  शरद पूर्णिमा की चांदनी की शीतलता में शायरों का इश्क़ परवान चढ़ता है।  चाँद शायरों की डायरी का वो पन्ना है जिस पर महबूबा की शक्ल-ओ-सीरत से लेकर रात की तन्हाई तक के किस्से लिखे जाते हैं। यह लेख़कों का वो पसंदीद बिम्ब है जिसकी प्रेरणा से उनकी कितनी ही नज़्में-ग़ज़लें सम्पूर्ण हो पाती हैं।
 

चाँद ख़ामोश जा रहा था कहीं
हम ने भी उस से कोई बात न की
- महमूद अयाज़

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....छत पर जा रहा है चाँद

 

पूछना चाँद का पता 'आज़र'
जब अकेले में रात मिल जाए
- बलवान सिंह आज़र


चाँद को तुम आवाज़ तो दे लो
एक मुसाफ़िर तन्हा तो है
- अज़ीम क़ुरैशी 

...तेरे ग़म का चाँद

हाथ में चाँद जहाँ आया मुक़द्दर चमका 
सब बदल जाएगा क़िस्मत का लिखा जाम उठा 
- बशीर बद्र

कल चौदवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
- इब्ने इंशा

चाँद को तैरना सिखाना है

पूछो ज़रा ये चाँद से कैसे सहर हुई
इतनी तवील रात भी कैसे बसर हुई
- फ़रह शाहि


चाँद ख़ुद को देख कर शरमाएगा
बादलों की ओट में छुप जाएगा
- सीमा शर्मा मेरठी 

वो चाँद कह के गया था...

वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं
- फ़रहत एहसास


चाँद निकला तो यूँ लगा मुझ को
शब की दीवार में भी दर निकला
- इल्यास राज भट्टी
5 वर्ष पहले
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