विज्ञापन

'सादगी' पर शायरों के अल्फ़ाज़

deepali agrawal

Kavya Charcha
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  

ख़ूब आराइशें भी हैं लेकिन
सादगी सादगी है क्या कहिए
- ताज अहमद ताज


अजब ख़ुलूस अजब सादगी से करता है
दरख़्त नेकी बड़ी ख़ामुशी से करता है
- अतुल अजनबी

विज्ञापन

वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
- हसरत मोहानी


बनावट हो तो ऐसी हो कि जिस से सादगी टपके
ज़ियादा हो तो असली हुस्न छुप जाता है ज़ेवर से
- सफ़ी लखनवी

पूछते हैं ये शाएरी क्या है
हाए ऐसी भी सादगी क्या है
- ख़ालिद इक़बाल ताइब


सभी अंदाज़-ए-हुस्न प्यारे हैं
हम मगर सादगी के मारे हैं
- जिगर मुरादाबादी

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
- मिर्ज़ा ग़ालिब


वो सादगी में भी है अजब दिलकशी लिए
इस वास्ते हम उस की तमन्ना में जी लिए
- जुनैद हज़ीं लारी

हाजत नहीं बनाओ कि ऐ नाज़नीं तुझे
ज़ेवर है सादगी तिरे रुख़्सार के लिए
- हैदर अली आतिश


जबीं पर सादगी नीची निगाहें बात में नरमी
मुख़ातिब कौन कर सकता है तुम को लफ़्ज़-ए-क़ातिल से
- हसरत मोहानी

6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

shafaque rauf

170 कविताएं

View Profile

श्री सनातन

436 कविताएं

View Profile

Anita Chaturvedi

158 कविताएं

View Profile

User

4 कविताएं

View Profile