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जन्मदिन विशेष: रेखा के अधूरे एहसास और वसी शाह की यह गज़ल...     

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  गुजरे जमाने की सुपरहिट अदाकारा रेखा आज 65 वां जन्मदिन मना रही हैं। रेखा का जन्म 10 अक्टूबर 1954 को हुआ था।रेखा का जीवन इश्क़ की एक अधूरी दास्तां कहा जा सकता है। उनके व्यक्तित्व पर वसी शाह की एक नज़्म का उल्लेख यहां किया जा रहा है।

अपने एहसास से छू कर मुझे संदल कर दो 
मैं कि सदियों से अधूरा हूँ मुकम्मल कर दो 

न तुम्हें होश रहे और न मुझे होश रहे 
इस क़दर टूट के चाहो मुझे पागल कर दो 
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अपनी आँखों में मिरे नाम का काजल कर दो... 

तुम हथेली को मिरे प्यार की मेहंदी से रंगो 
अपनी आँखों में मिरे नाम का काजल कर दो 

इस के साए में मिरे ख़्वाब दहक उट्ठेंगे 
मेरे चेहरे पे चमकता हुआ आँचल कर दो 
 

इस क़दर बरसो मिरी रूह में जल-थल कर दो... 

धूप ही धूप हूँ मैं टूट के बरसो मुझ पर 
इस क़दर बरसो मिरी रूह में जल-थल कर दो 

जैसे सहराओं में हर शाम हवा चलती है 
इस तरह मुझ में चलो और मुझे जल-थल कर दो 
 

और मुझे मेरी निगाहों से भी ओझल कर दो... 

तुम छुपा लो मिरा दिल ओट में अपने दिल की 
और मुझे मेरी निगाहों से भी ओझल कर दो 

मसअला हूँ तो निगाहें न चुराओ मुझ से 
अपनी चाहत से तवज्जोह से मुझे हल कर दो 
 

एक एहसान करो इस को मुसलसल कर दो... 

अपने ग़म से कहो हर वक़्त मिरे साथ रहे 
एक एहसान करो इस को मुसलसल कर दो 

मुझ पे छा जाओ किसी आग की सूरत जानाँ 
और मिरी ज़ात को सूखा हुआ जंगल कर दो 
 
7 वर्ष पहले
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