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'इश्क़' पर 10 मशहूर शायरों के चुनिंदा शेर

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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                                                  कुछ कह रही हैं आप के सीने की धड़कनें 
मेरा नहीं तो दिल का कहा मान जाइए 
~क़तील शिफ़ाई

मोहब्बत में ज़रा सी बेवफ़ाई तो ज़रूरी है
वही अच्छा भी लगता है जो वादे तोड़ देता है
~ वसीम बरेलवी
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कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में 
~बहादुर शाह ज़फ़र

छोड़ना है तो न इल्ज़ाम लगा कर छोड़ो
कहीं मिल जाओ तो फिर लुत्फ़ -ए -मुलाक़ात रहे 
~माधव राम जौहर

आई है कुछ न पूछ क़यामत कहाँ कहाँ 
उफ़ ले गई है मुझको मोहब्बत कहाँ कहाँ
~फ़िराक़ गोरखपुरी

गुलाब जिस्म का यूँ ही नहीं खिला होगा
हवा ने पहले तुझे फिर मुझे छुआ होगा 
~ शहरयार 

गुफ़्तुगू अच्छी लगी ज़ौक़-ए-नज़र अच्छा लगा 
मुद्दतों के बाद कोई हमसफ़र अच्छा लगा
~अहमद फ़राज़

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है 
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है  
~जिगर मुरादाबादी

कहने देती नहीं कुछ मुँह से मोहब्बत मेरी 
लब पे रह जाती है आ आ के शिकायत मेरी 
~दाग़ देहलवी 

भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम 
क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए 
~ ख़ुमार बाराबंकवी
7 वर्ष पहले
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