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आज वन-उपवन में चंचल मेरे मन में - काज़ी नज़रुल इस्लाम

deepali agrawal

Kavya Charcha
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                            आज वन-उपवन में चंचल मेरे मन में
        
                                                    
                            
मोहन मुरलीधारी कुंज कुंज फिरे श्याम
सुनो मोहन नुपूर गूंजत है
बाजे मुरली बोले राधा नाम
कुंज कुंज फिरे श्याम
बोले बांसुरी आओ श्याम-पियारी,
ढूंढ़त है श्याम-बिहारी,
बनमाला सब चंचल उड़ावे अंचल,
कोयल सखी गावे साथ गुणधाम कुंज कुंज श्याम
फूल कली भोले घूंघट खोले
पिया के मिलन कि प्रेम की बोली बोले,
पवन पिया लेके सुन्दर सौरभ,
हंसत यमुना सखी दिवस-याम कुंज कुंज फिरे श्याम
6 वर्ष पहले
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