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'हालात' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

deepali agrawal

Kavya Charcha
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जी चाहता है जीना जज़्बात के मुताबिक़
हालात कर रहे हैं हालात के मुताबिक़
- इफ़्तिख़ार राग़िब


यही हालात इब्तिदा से रहे
लोग हम से ख़फ़ा ख़फ़ा से रहे
- जावेद अख़्तर

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हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे
अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई
- असद भोपाली


हालात से ख़ौफ़ खा रहा हूँ
शीशे के महल बना रहा हूँ
- क़तील शिफ़ाई

इतने मायूस तो हालात नहीं
लोग किस वास्ते घबराए हैं
- जाँ निसार अख़्तर


सुब्ह कैसी है वहाँ शाम की रंगत क्या है
अब तिरे शहर में हालात की सूरत क्या है
- अज़हर अदीब

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया
- साहिर लुधियानवी


ज़रा हालात क्या बदले हमारे
जो अपना था पराया हो रहा है
- नबील अहमद नबील

दिल और तरह के हालात से उलझता हुआ
कुछ और तरह के हालात से निकलता है
- ज़फ़र इक़बाल


हालात ने लिबास तो मेला किया मगर
किरदार फिर भी रक्खा है हम ने सँवार कर
- क़ैसर ख़ालिद

6 वर्ष पहले
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