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ज़िंदगी के 'फ़सानों' पर शायरों के अशआर

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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फ़साना का मतलब है - वह व्यक्ति या कहानी जो कल्पना पर आधारित हो। कई बार लोग हमारी ज़िंदगी से यूं जाते हैं कि जैसे वह एक फ़साना ही हों। इस पर शायरों ने ख़ूब लिखा है। पढ़ें शायरों के अल्फ़ाज़

कुछ इस तरह से वो शामिल हुआ कहानी में
कि इस के बाद जो किरदार था फ़साना हुआ
- सलीम कौसर


अब तो रुस्वाइयाँ यक़ीनी हैं
उन के लब पर मिरा फ़साना है
- क़ैसर निज़ामी

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फ़साना-दर-फ़साना फिर रही है ज़िंदगी जब से
किसी ने लिख दिया है ताक़-ए-निस्याँ पर पता अपना
- अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा


'क़मर' अपने दाग़-ए-दिल की वो कहानी मैंने छेड़ी
कि सुना किए सितारे मेरा रात भर फ़साना
- क़मर जलालवी

ज़बाँ तक जो न आए वो मोहब्बत और होती है
फ़साना और होता है हक़ीक़त और होती है
- वामिक़ जौनपुरी

सुन के मेरा फ़साना उन्हें लुत्फ़ आ गया
सुनता हूँ अब कि रोज़ तलब क़िस्सा-ख़्वाँ की है
- दाग़ देहलवी

सुख़न-वरी का बहाना बनाता रहता हूँ
तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ
- असअद बदायुनी

क़रीब आ के भी इक शख़्स हो सका न मेरा
यही है मेरी हक़ीक़त यही फ़साना मेरा
- असलम कोलसरी

ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा
वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा
- अज़हर लखनवी

इक नज़र का फ़साना है दुनिया
सौ कहानी है इक कहानी से
- नुशूर वाहिदी

7 वर्ष पहले
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