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'बच्चों' के लिए कहे शायरों के अल्फ़ाज़

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी
आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा
- नज़ीर क़ैसर


कल यही बच्चे समुंदर को मुक़ाबिल पाएंगे
आज तैराते हैं जो काग़ज़ की नन्ही कश्तियां
- हसन अकबर कमाल

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बच्चे खुली फ़ज़ा में कहां तक निकल गए
हम लोग अब भी क़ैद इसी बाम-ओ-दर में हैं
- असग़र मेहदी होश


भूक चेहरों पे लिए चांद से प्यारे बच्चे
बेचते फिरते हैं गलियों में ग़ुबारे बच्चे
- बेदिल हैदरी

किसी बच्चे से पिंजरा खुल गया है
परिंदों की रिहाई हो रही है
- ज़िया ज़मीर


रास्ता रोक लिया मेरा किसी बच्चे ने
इस में कोई तो 'असर' मेरी भलाई होगी
- असर अकबराबादी

दिल भी इक ज़िद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह
या तो सब कुछ ही इसे चाहिए या कुछ भी नहीं
- राजेश रेड्डी


वो लम्हा जब मिरे बच्चे ने मां पुकारा मुझे
मैं एक शाख़ से कितना घना दरख़्त हुई
- हुमैरा रहमान

यहां शोर बच्चे मचाते नहीं हैं
परिंदे भी अब गीत गाते नहीं हैं
- ख़ालिद अबरार


अब ये बच्चे नहीं बहलावे में आने वाले
कल भी आए थे इधर खेल दिखाने वाले
- कौसर मज़हरी

5 वर्ष पहले
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